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कारस्तानी का खुलासा:भविष्य निधि निकलने के बाद भी पता नहीं चला, न मैसेज पहुंचा क्योंकि मोबाइल की जगह जेल का लैंडलाइन नंबर डाल देते थे
केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में 100 कर्मचारियों के भविष्य निधि का 13 करोड़ रुपए गबन करने वालों ने शार्प अपराधियों की तरह शातिराना दिमाग लगाया है। जिसे लेकर ट्रेजरी और पुलिस की एक्सपर्ट टीम तक चकित है कि पात्रता लिमिट क्रास कर कर्मचारियों के खाते माइनस में कैसे चले गए। इतना ही नहीं कर्मचारियों को भी इसलिए गबन के बारे में पता नहीं चला अथवा मैसेज मिला क्योंकि विभागीय भविष्य निधि की प्रक्रिया के दौरान उनके मोबाइल नंबर की जगह जेल का लैंडलाइन नंबर फिट कर देते थे।
जेल डीजी अरविंद कुमार अभी तक बातचीत के दौरान यही कहते रहे कि ऐसा कैसे हो सकता है कि कर्मचारियों को उनकी भविष्य निधि निकलने का पता तक नहीं चला। जांच में जुटी तकनीकी टीमों को ये कारस्तानी की वजह समझ में आई है। डीडीओ अर्थात जेल अधीक्षक की लॉगइन आईडी से कर्मचारियाें की भविष्य निधि के आवेदन वैरिफाई हुए और फिर राशि भुगतान के लिए ट्रेजरी शाखा को भेजने के दौरान संबंधित कर्मचारी का मोबाइल नंबर हटाकर जेल का लैंडलाइन नंबर इसलिए डालते ताकि उसे मैसेज नहीं पहुंचे। यहीं वजह रही कि एक भी कर्मचारी को उनकी भविष्य निधि निकलने का पता नहीं चल पाया। इसी की छानबीन के लिए भोपाल से आई कोषालय की टीम बुधवार को भैरवगढ़ जेल में कई घंटे तक जानकारी जुटाती रही। जेल अधीक्षक उषा राज व भविष्य निधि का काम देखने वाला फरार बाबू रिपूदमन कर्मचारियों को उनकी प्रोविडेंट फंड की डिटेल तक नहीं देते थे। अधीक्षक कहती थीं कि क्या जरूरत है। रिपूदमन ये कहकर चलता कर देता कि सर्वर डाउन है।
एक और सिपाही को आरोपी बनाया
पुलिस ने फरार आरोपी रिपूदमन के बाद शैलेंद्र सिकरवार को भी आरोपी बना लिया है। उसके घर नोटिस भी चस्पा कर दिया है। सिपाही धर्मेंद्र लोधी की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
गृहमंत्री ने कहा- जांच रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई हाेगी
गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भास्कर से कहा कि उज्जैन की सेंट्रल जेल को लेकर जो भी घटनाक्रम सामने आया है उसमें जांच को दल भेजा है। रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई का निर्णय लेंगे।